देवासी दर्पण हिन्दी वार्षिक पत्रिका में आप पढेंगे आज तक कितने राजकीय कर्मचारी बनें और समाज ने कितनी तरक्की की साथ ही यह भी जानेंगे की अपनो को और कितनी तरक्की की जरूरत हैं ! देवासी समाज को एकजुट होने क़ि आज की महती जरुरत है और शिक्षा की कमी को दूर करने के लिए शिक्षित लोग आगे आए ?

Wednesday, November 17, 2010

रेबारी समाज के सम्मान समारोह का आयोजन हुआ, शिक्षा के क्षेत्र में जागृति लाने की बात कही।

जालोर आगमन पर सर्किट हाऊस में सिरोही विधायक ओटाराम देवासी के मंगलवार को पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि सरकार आमजन के लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। जयपुर में प्रदेशभर के सरपंचों और सिरोही में भाजपा व संघ कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बरबरता से लाठी चलाई। उन्होंने कहा कि सरकार किसान विरोधी है। किसानों को सात घंटे बिजली देने का वादा किया गया है, जबकि किसानों को लगातार चार घंटे बिजली भी मुहैया नहीं हो रही है। इस मौके भाजपा नेता चिरंजीलाल दवे, भूपेंद्र देवासी, नगर अध्यक्ष ओटाराम सोलंकी, पूर्व प्रधान राजू सांखला, लकमाराम देवासी, पार्षद पोनी देवी, दशरथ सिंह और अशोक गुर्जर समेत भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
निकटवर्ती आकोली गांव में रेबारी समाज के सम्मान समारोह का आयोजन मंगलवार को हुआ। समारोह में सिरोही विधायक ओटाराम भोपा ने रेबारी समाज के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालकों को पशुओं के बीमा व विभिन्न योजनाओं लाभ उठाना चाहिए। वहीं समाज में शिक्षा के क्षेत्र में जागृति लाने की बात कही। इस दौरान वणाराम, भाजपा पशुपालन प्रकोष्ठ के प्रदेश मंत्री नारायण देवासी, पहाडुं खां, भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष हनवंत सिंह, बजरंगसिंह, प्रतापसिंह, रूपाराम व जवानाराम समेत कई जने मौजूद थे।

Saturday, September 18, 2010

रेबारी समुदाय के लोगों का देवझूलनी एकादशी की रात को सारणेश्वर में राज रहता है।

सिरोही। जिलेभर में देवझूलनी एकादशी पर रेवाडियां निकाली गई। जिला मुख्यालय पर पैलेस रोड स्थित पद्मनाथ मंदिर से शाम पांच बजे पूर्व नरेश रघुवीरसिंह देवडा पालकी उठाकर लाखेराव तालाब की ओर प्रस्थान किया। पद्मजी मंदिर के पुजारी इंदर वैष्णव ने बताया कि इनके पीछे कई पालकियां चली। सैंकडों की तादाद में रेबारी समुदाय के लोग इस रेवाडी में भूरिया बाबा की जयकार करते हुए चले। गोपालजी मंदिर में भी रघुवीरसिंह ने पूजा अर्चना की। लाखेराव तालाब पर पहुंचने पर पालकी में विराजित भगवान की पूजा की गई। वहां से पालकी फिर से राजमहल पहुंची। शेष पालकियां भी अपने-अपने स्थान को निकली।शहर के दक्षिणी मेघवालवास से अपराह्न पालकी निकाली गई जो शहर के बस स्टैण्ड, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, नीलमणी चौक, पैलेस रोड होते हुए रामदेव मंदिर पहुची। वहीं उत्तरी मेघवालवास की ओर से भी पालकी का निकाली गई जो नयावास घांचीवाडा, सौनारवाडा, सदर बाजार, सरजावाव दरवाजा, राजमाता धर्मशाला मार्ग होते हुए रामदेव मंदिर पहुंची जहा मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया गया। नयावास के सैनिकवास से भी पालकी का आयोजन किया गया।
डीजे पर थिरके युवक युवतियां
शहर में तीनों पालकियों में डीजे के री-मिक्स धुनों पर युवक युवतिया नृत्य करते नजर आए। इन शोभायात्राओं में युवतियां विशेष परिधानों में सजधज कर पालकी की शोभा बढा रही थी।
रेबारी समुदाय का रहा जमावडा
ऎसे में शहर में दोपहर में रेबारी समुदाय के युवक-युवतियों का जमावडा रहा। लडकी के साथ अभद्रता करने पर एक युवक को रेबारी युवकों ने धुनाई की। वहीं कई युवकों ने रास्ते में पडी मोटरसाइकिलों को भी अपनी लाठी से नुकसान पहुंचाया।




Saturday, August 7, 2010

शिवगंज में देवासी प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।


शिवगंज। देवासी समाज सेवा समिति शिवगंज के बैनर तले आंबेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आठ अगस्त को विधायक ओटाराम देवासी के मुख्य आतिथ्य एवं रानीवाड़ा विधायक रतन देवासी की अध्यक्षता  में प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष लाखाराम बडग़ांव व सचिव भगवानाराम जोगापुरा ने बताया कि समारोह में समाज के जनप्रतिनिधियों एवं छात्रों का बहुमान किया जाएगा।
समारोह में कई सम्मानीय व्यक्तियों एवं छात्रों का बहुमान किया जाएगा-
देवासी समाज सेवा प्रतिभा सम्मान में समारोह  अहमदाबाद के निंबाराम देवासी, मंडवारिया के तीर्थगिरी महाराज, भोलाराम देवासी, आलपा सरपंच रताराम देवासी, खेजडिय़ा के पूर्व सरपंच भीखाराम देवासी, बडग़ांव के पूर्व सरपंच जूजाराम देवासी, वेराजेतपुरा के धीराराम देवासी, छोगाराम देवासी, धन्नाराम देवासी सहित कई सम्मानीय व्यक्ति भी भाग लेंगे।

Monday, May 31, 2010

भगवान विष्णु क्यों हैं तीनों देवों में श्रेष्ठ?

वैसे तो तीनों ही देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं परंतु इन तीनों में भी कौन श्रेष्ठ हैं?इस संबंध में एक कथा के अनुसार महर्षि भृगु एक दिन विष्णु से मिलने गए। उस समय भगवान विष्णु शेषनाग पर सो रहे थे। महर्षि भृगु के आने का उन्हें ध्यान ही नहीं रहा और वे महर्षि के सम्मान में खड़े नहीं हुए। अतिक्रोधित स्वभाव वाले भृगु ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोध से विष्णु की छाती पर लात मार दी। इस प्रकार जगाए जाने पर भी विष्णु ने धैर्य रखा और तुरंत ही महर्षि भृगु के सम्मान में खड़े होकर उन्हें प्रणाम किया।भगवान विष्णु ने विनयपूर्वक कहा कि महर्षि आपके पैर पर चोट तो नहीं लगी? मैं बड़ा कठोर हृदय हूं, उन्होंने महर्षि के पैर पकड़ लिए और सहलाने लगे। विष्णु की इस महानता से प्रसन्न महर्षि भृगु ने उन्हें देवों में श्रेष्ठ घोषित किया।और लक्ष्मी ने मांगा विष्णु कोभागवत में भगवान विष्णु के अवतार वामन और राजा बलि का प्रसंग आता है। दैत्यराज बलि दानवीर था। वह किसी को खाली हाथ नहीं जाने देता था। भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी। दानी बलि वामनदेव को तीन पग जमीन देने के लिए मान गए।वामनदेव ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया। जब भगवान वामन ने दो ही पग में स्वर्ग और पृथ्वी नाप ली तो तीसरा पैर कहां रखे? इस बात को लेकर बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया। वचन के पक्के बलि अपना सिर भगवान के सामने कर दिया और कहा हे देव तीसरा पग आप मेंरे सिर पर रख दीजिए। भगवान वामन ने वैसा ही किया और पैर रखते ही बलि पातल लोक में पहुंच गया।बलि की उदारता से भगवान बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे पातल लोक का राजा बना दिया और वर मांगने के लिए कहा। बलि ने वर मांगा कि भगवान विष्णु आप मेरे द्वारपाल बनकर रहें। विष्णु ने उसे यह वर प्रदान किया और वे बलि के द्वारपाल बनकर रहने लगे। इससे विष्णुप्रिया लक्ष्मीजी चिंता में पड़ गईं कि अगर स्वामी पातल लोक में द्वारपाल बन कर रहेंगे तब बैकुंठ लोक का क्या होगा? देवी लक्ष्मी ऐसा विचार कर ही रही थी कि देवर्षि नारद वहां आ गए। देवर्षि को देख लक्ष्मीजी ने उन्हें अपनी समस्या कह सुनाई। नारदजी ने कहा कि आप राजा बलि को अपना भाई बना लीजिए। लक्ष्मीजी ने वैसा ही करा और राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भाई बना लिया। तब बलि ने बहन लक्ष्मी से वर मांगने के लिए कहा। लक्ष्मीजी ने तुरंत ही अपने स्वामी भगवान विष्णु को वर में मांग लिया। इस तरह देवी लक्ष्मी को भगवान विष्णु पुन: मिल गए।












Saturday, May 8, 2010

गांव के 'छोरों' की ऊंची उडान

जालोर।बाग बिक जाते हैं जरदार के हाथों फूलों की खुश्बू से रस्ते तो महक जाते हैं।तुम्हें हीरे की सिफात है तो अंधेरे में मिलो उजाले में तो कांच के टुकडे भी चमक जाते हैं।
रेत के खिलौनों से खेलकर व सरकारी स्कूलों में मिट्टी की स्लेट पर पढने वाले ठेठ ग्रामीण परिवेश में पले-बढे गांव के युवाओं ने इन पंक्तियों को चरितार्थ कर इतिहास रचा है। हल थामने वाले इन भçूमपुत्रों के मजबूत इरादों के सामने अब आसमान भी छोटा पडने लगा है। अभावों से अपनी मंजिल तय करने वाले युवाओं ने ऊंची उडान भर यह जता दिया है कि सफलता परिस्थितियों की मोहताज नहींं होती है। पिछले तीन सालों में जालोर के छह युवाओं का भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ है, जबकि इन सालों में 10 प्रतियोगी साक्षात्कार तक पहुंचे हैं। इससे पहले की स्थिति पर गौर करें तो आजादी के बाद से 2007 से पहले तक जालोर जिले के महज चार युवा भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का गौरव हासिल कर सके हैं। शिक्षा की दृष्टि से अति पिछडे जालोर के लिए यह उपलब्घि कहीं ज्यादा मायने रखती है। ग्रामीण परिवेश से भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय करने की यह शुरूआत अच्छा संकेत है।
आरएएस बने आईएएस
दो आरएएस अफसरों को जालोर में पदस्थापन के दौरान भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का मौका मिला। वर्ष 2007 में जालोर में आरएएस प्रशिक्षु बलवंतसिंह कालेवा का 37 वीं रेंक पर चयन हुआ। वर्तमान में वे उडीसा कैडर के आईएएस है। सांचौर में बतौर उपखंड अघिकारी पदस्थापित भैराराम चौधरी का भी वर्ष 2008 में आईआरएस में चयन हुआ।
आरएएस अफसरों की भरमार
पिछले कुछ सालों में जालोर जिले से आरएएस में चयनित युवाओं की संख्या तो और भी तेजी से बढी है। तीन सालों में जालोर जिले के करीब तीन दर्जन से अघिक युवा आरएएस अफसन बने हैं। इनमें ग्रामीण तबके के युवाओं की संख्या नब्बे फीसदी है।
टॉप किया आईआईटी
सायला पंचायत समिति के भूंडवा निवासी डूंगाराम चौधरी ने वष्ाü 2002 में आईआईटी में देशभर में टॉप किया था। सामान्य परिवार में जन्मे चौधरी ने गांव में रह कर ही अध्ययन किया। चौधरी के टॉप करने से जालोर जिला गौरवांतित हुआ।
पूर्व में चयनित
इनसे पहले जिले में हरजी गांव के अभिमन्यूसिंह (आईएएस), सियाणा के
सुशील सोलंकी (आईआरएस), तवाव के ओमप्रकाश कांत (आईआरएस) और रामसीन के गंगासिंह परमार(गुजरात राज्य सेवा से पदोन्नत) आईएएस ने इस परीक्षा में सफल होकर जिले का मान बढाया था।



समाज को शिक्षित करने पर बल उथमण में रेबारी जाति के सम्मेलन का आयोजन

सिरोही ! रेबारी जाति का सम्मेलन शुक्रवार को पूर्व सिरोही नरेश रघुवीर सिंह देवड़ा के मुख्य आतिथ्य व पूर्व जिला प्रमुख अन्नाराम बोराणा में आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने समाज के नौनिहालों को शिक्षित करने पर बल देते हुए इसे विकास की पहली सीढ़ी बताया। सिरोही के पूर्व नरेश रघुवीरसिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि रेबारी जाति में शिक्षा का स्तर कम है। अत: धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ शिक्षा की प्रगति करनी होगी, तब ही समाज शिक्षित व विकसित होगा। इसी क्रम में बोराणा ने लोगों से आग्रह किया कि लोग बच्चे-बच्चियों को स्कूलों में भेजकर उन्हें शिक्षित करें, तभी समाज का विकास होगा। इससे पहले अतिथियों को ढोल बाजा से स्वागत किया गया। मंच पर उनको साफा एवं पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर ठाकुर सिंह, हरी सिंह, उपसंरपंच दिलीप दवे, माल सिंह देवड़ा, धोका सिंह पटवारी, गणपत सिंह देवड़ा, वीराराम रेबारी, दलाराम रेबारी, धरमाराम रेबारी, गणेशराम रेबारी, सरदारसिंह भाटी आदि उपस्थित रहे।